मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने सहसपुर में 50 बीघा पर चल रही अवैध कॉलोनी ध्वस्त की
The Mussoorie-Dehradun Development Authority demolished an illegal colony being developed on 50 bighas of land in Sahaspur.

राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अनियोजित विकास और अवैध प्लाटिंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने गुरुवार को सहसपुर के कल्याणपुर में लगभग 50 बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई में प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम, पुलिस बल और संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
प्राधिकरण को प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच में पाया गया कि भूमि का मालिक जैद रफी बिना किसी आधिकारिक स्वीकृति के यहाँ बड़े पैमाने पर प्लाटिंग करवा रहा था। स्थल पर प्लॉटों का चिन्हीकरण और आंतरिक संपर्क मार्ग के रूप में सीसी सड़क का निर्माण भी कर दिया गया था। एमडीडीए ने बताया कि यह कार्य उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) संशोधन अधिनियम 2009 के प्रावधानों का उल्लंघन था।
जांच के बाद एमडीडीए ने संबंधित भू-स्वामी के विरुद्ध वाद योजित किया और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद गुरुवार को अवैध संरचनाओं और प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण ने कहा कि यह कार्रवाई अनियोजित और बिना अनुमति विकसित होने वाली कॉलोनियों के विरुद्ध उसकी सख्त नीति का हिस्सा है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और प्लाटिंग किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की मंशा के अनुरूप सुनियोजित और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और कल्याणपुर की यह कार्रवाई उसी दिशा में सख्त संदेश है। तिवारी ने प्रवर्तन टीमों को विकास क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखने और अवैध गतिविधियों पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि देहरादून और आसपास के विकास क्षेत्रों में ऐसे मामलों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है और जहां भी बिना अनुमति किसी प्रकार का निर्माण या प्लाटिंग मिलता है, वहां तुरंत जांच व कार्रवाई की जाती है। बर्निया ने जनता और निवेशकों से अपील की कि वे किसी भी भू-खंड या कॉलोनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधता व स्वीकृति संबंधी जानकारी एमडीडए से अवश्य प्राप्त करें, अन्यथा उन्हें भविष्य में कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्राधिकरण ने कहा कि अनियोजित विकास न सिर्फ शहर की बुनियादी संरचनाओं पर दबाव बढ़ाता है, बल्कि नागरिक सुविधाओं और यातायात व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डालता है। एमडीडीए ने पारदर्शी, सुरक्षित और सुनियोजित शहरी विकास के लिए प्रतिबद्धता जताई और कहा कि भविष्य में भी ऐसे उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी जाएगी।



