हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाला: IAS वरुण चौधरी समेत 10 पर विजिलेंस की FIR, तीन राज्यों में छापेमारी

हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित जमीन घोटाले में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी समेत 10 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज होते ही विजिलेंस की आठ टीमों ने कोर्ट से सर्च वारंट लेकर उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
क्या है पूरा मामला?
मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा किसानों से खरीदी गई जमीन से जुड़ा है। जांच के अनुसार यह कृषि भूमि थी, जिसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई गई। आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने कुछ ही दिनों में जमीन का भू-उपयोग कृषि से आवासीय करवा दिया, जिसके बाद उसकी कीमत बढ़कर लगभग 54 करोड़ रुपये हो गई। भू-उपयोग बदलने के तुरंत बाद किसानों से जमीन खरीदने का समझौता कर लिया गया।
मामले की विजिलेंस जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद शासन की अनुमति मिलने पर एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच विजिलेंस की डिप्टी एसपी हर्षवर्धनी सुमन कर रही हैं।
तीन राज्यों में विजिलेंस की छापेमारी
एफआईआर के बाद विजिलेंस की आठ टीमों ने दिल्ली, लखनऊ, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और रुद्रप्रयाग समेत विभिन्न स्थानों पर आरोपियों के आवासों पर छापेमारी कर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की।
इन 10 लोगों को बनाया गया आरोपी
विजिलेंस ने जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं—
तत्कालीन नगर आयुक्त (आईएएस) वरुण चौधरी
सहायक नगर आयुक्त रवींद्र कुमार दयाल
कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट
प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रा
संपत्ति क्लर्क वेदपाल
मानचित्रकार दिनेश चंद्र कांडपाल
जमीन विक्रेता सुमन देवी
जितेंद्र कुमार
अभिषेक यादव
सुजीत कुमार सिंह
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
धारा 318(4) – धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति का हस्तांतरण (अधिकतम 7 वर्ष की सजा)
धारा 61 – आपराधिक साजिश (मुख्य अपराध के अनुसार 4 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान)
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
पूर्व डीएम कर्मेंद्र सिंह पर केस नहीं, चर्चा तेज
इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, समीक्षा में उन्हें आपराधिक मंशा का नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का दोषी माना गया है। इसी आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर के बजाय विभागीय स्तर पर मेजर पेनल्टी (दीर्घ शास्ति) की संस्तुति की गई है, जबकि आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के खिलाफ बर्खास्तगी की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी गई है।



