15 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

नैनीताल: देहरादून के विकासनगर स्थित ईस्ट होप टाउन क्षेत्र की उमेदपुर में सरकारी भूमि पर स्थित बरसाती नाले पर कथित अतिक्रमण और भूमि की अवैध बिक्री से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी देहरादून और प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में बताया गया कि पूर्व के आदेश के बावजूद जिलाधिकारी और प्रभागीय वनाधिकारी की ओर से शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया। अधिकारियों ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
सुनवाई के दौरान अधिकारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि क्षेत्र में कई अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि शेष स्थानों पर तारबाड़ की जानी है और अतिक्रमण का चिन्हांकन किया जाना बाकी है। वहीं, बिल्डर पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया कि अतिक्रमण के चिन्हांकन की प्रक्रिया के दौरान उन्हें भी उपस्थित रहने का अवसर दिया जाए।
15 बीघा सरकारी नाले की भूमि पर अतिक्रमण का आरोप
जनहित याचिका देहरादून निवासी प्रभु दयाल शर्मा द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विकासनगर के ईस्ट होप टाउन क्षेत्र स्थित उमेदपुर में लगभग 15 बीघा सरकारी बरसाती नाले की भूमि पर बिल्डरों ने अवैध अतिक्रमण कर प्लॉटिंग की और उसे लोगों को बेच दिया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी शिकायत पर गठित जांच समिति ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभागीय वनाधिकारी की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि बरसाती नाले से सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं तथा मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाएं।
अब इस मामले में सभी की निगाहें दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई और प्रशासन की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।



