शहीद मनोज राणा के सम्मान में बड़ा फैसला, देहरादून में बनेगा पहाड़ी शैली का स्मृति द्वार

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के राजपुर में अमर शहीद राइफलमैन मनोज राणा की स्मृति में 27 लाख रुपये की लागत से पहाड़ी शैली का शहीद स्मृति द्वार बनाया जाएगा। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने शहीद की 13वीं पुण्यतिथि पर स्मृति द्वार का शिलान्यास करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीदों के सम्मान तथा सैनिक कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में गणेश जोशी ने राजपुर स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के माध्यम से पहाड़ी वास्तुकला शैली में बनने वाला यह स्मृति द्वार शहीद मनोज राणा के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान का स्थायी प्रतीक बनेगा।
शहीदों का बलिदान हमेशा रहेगा प्रेरणास्रोत
सैनिक कल्याण मंत्री ने कहा कि शहीद मनोज राणा का बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश को अनेक जांबाज सैनिक दिए हैं, जिन्होंने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
उन्होंने कहा कि वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, शहीद स्मृति द्वार केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति, बलिदान और उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य परंपरा का प्रतीक होगा।
सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण पर सरकार का फोकस
गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड को वीरों की भूमि कहा जाता है और देश की सीमाओं पर तैनात प्रत्येक पांचवां सैनिक उत्तराखंड से होने का गौरव राज्य को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जब-जब देश पर संकट आया, उत्तराखंड के वीर जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए राष्ट्र रक्षा में अपना सर्वोच्च योगदान दिया।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं पर लगातार कार्य कर रही है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
कौन थे शहीद मनोज राणा?
अमर शहीद राइफलमैन मनोज राणा भारतीय सेना की 15 राष्ट्रीय राइफल्स (15 RR) और 2/4 गोरखा राइफल्स में तैनात थे। 27 जुलाई 2013 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान उन्होंने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके शौर्य और राष्ट्र सेवा को आज भी पूरे सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाता है।



