
देहरादून: जिज्ञासा विश्वविद्यालय (पूर्व में हिमगिरि ज़ी विश्वविद्यालय) में “उच्च शिक्षा के लिए जनरेटिव एआई: शिक्षण, अनुसंधान, मूल्यांकन और अकादमिक उत्कृष्टता का रूपांतरण” विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नवीनतम उपयोगों से परिचित कराना और शिक्षण, अनुसंधान व मूल्यांकन प्रक्रियाओं में इसके प्रभावी इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

उच्च शिक्षा का भविष्य बदल रहा है: प्रो. डॉ. इरफान खान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जिज्ञासा विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रोफेसर डॉ. इरफान खान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उच्च शिक्षा के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को निरंतर अपडेट रखना होगा, ताकि विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और नवाचार आधारित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
जनरेटिव एआई शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का सशक्त माध्यम
प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. संदीप कौटिश ने कहा कि जनरेटिव एआई केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षण, अनुसंधान और अकादमिक उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
आईबीएम स्किल्स बिल्ड विशेषज्ञ ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान आईबीएम स्किल्स बिल्ड के प्रशिक्षक अमन श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को जनरेटिव एआई के विभिन्न टूल्स, प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, शिक्षा एवं शोध में एआई आधारित नवाचारों और उनके व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक अभ्यास भी किया।
बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में डीन रिसर्च एवं निदेशक आईक्यूएसी प्रोफेसर डॉ. मनीष शर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. जसनदीप सिंह, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।



