
देहरादून की शांत और सुरक्षित मानी जाने वाली पहचान पर इन दिनों सवाल उठने लगे हैं। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से रोजाना मारपीट, चोरी, नशाखोरी, और विवाद जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। हालात यह हैं कि आम जनता अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है।
लगातार बढ़ रही इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल देहरादून पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। क्या पुलिस वास्तव में जमीन पर सक्रिय है या फिर केवल कागजी कार्रवाइयों और मीडिया ब्रीफिंग तक ही सीमित रह गई है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में पुलिस की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायत दर्ज होने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं होती, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। वहीं, पुलिस द्वारा समय-समय पर चलाए जा रहे चेकिंग अभियान और प्रेस नोट में दिखाई जाने वाली सक्रियता, जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुलिसिंग केवल आंकड़ों और प्रेस रिलीज तक सीमित रही, तो अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा। जरूरत है कि पुलिस वास्तविक रूप से फील्ड में उतरकर सक्रिय गश्त बढ़ाए, संवेदनशील इलाकों पर नजर रखे और आम जनता के साथ संवाद मजबूत करे।
फिलहाल, शहर में बढ़ती घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि उत्तराखंड पुलिस इस चुनौती से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है या फिर हालात यूं ही कागजों और खबरों तक सीमित रहेंगे।
एक के बाद एक सामने आ रही घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि आखिर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद अपराध और लापरवाही क्यों नहीं थम रही।
रायपुर थाने की हवालात में मौत – सबसे बड़ा सवाल
सबसे गंभीर मामला रायपुर थाना का है, जहां पीआरडी जवान सुनील रतूड़ी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
- पुलिस के अनुसार, जवान को शराब के नशे में हंगामा करने पर गिरफ्तार किया गया था
- हवालात में बंद करने के कुछ समय बाद वह संदिग्ध हालत में मिला
- शुरुआती तौर पर आत्महत्या (कंबल से फंदा) की बात सामने आई है
लेकिन इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- पुलिस की निगरानी में हवालात के अंदर आत्महत्या कैसे हुई?
- क्या सुरक्षा और निगरानी में लापरवाही थी?
- परिजनों ने सूचना न देने और लापरवाही के आरोप लगाए
घटना की गंभीरता को देखते हुए कई पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर भी किया गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं ।
प्रेमनगर क्षेत्र – छात्रों को जान से मारने की धमकी
दूसरा मामला प्रेमनगर थाना क्षेत्र का है, जहां कॉलेज के कुछ युवकों द्वारा छात्रों को जान से मारने की धमकी देने की घटना सामने आई।
ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि:
- युवाओं में अपराध की प्रवृत्ति बढ़ रही है
- कॉलेज और हॉस्टल क्षेत्रों में पुलिस की पकड़ कमजोर दिख रही है
- समय रहते सख्ती नहीं होने से घटनाएं बढ़ती जा रही हैं
लगातार सामने आ रही अन्य घटनाएं
हाल के दिनों में शहर में:
- मारपीट और झगड़े
- नशे में उत्पात
- सड़क हादसे
- छोटे-छोटे अपराधों की बढ़ती घटनाएं
इन सभी ने मिलकर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



