शहरी विकास विभाग में EO की अस्थायी नियुक्तियों पर घमासान, बेरोजगार संघ सड़कों पर

देहरादून : उत्तराखंड में शहरी विकास विभाग के एक फैसले ने सियासी और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। विभाग द्वारा नगर निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश के बाद शुक्रवार को उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने मोर्चा खोल दिया।
सैकड़ों की संख्या में युवा शहरी विकास निदेशालय पहुंचे। हाथों में तख्तियां और नारों के साथ उन्होंने सरकार से तुरंत आदेश वापस लेने की मांग की।
बेरोजगार संघ ने क्या कहा
संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल ने कहा कि प्रदेश में EO के करीब 60 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से ज्यादातर लंबे समय से खाली हैं। इन पदों पर नियमित भर्ती होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने विभाग के क्लर्क, कर निरीक्षक और सफाई निरीक्षक को प्रभारी EO बना दिया।
उन्होंने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने हर तैनाती के लिए 15 लाख रुपये लेकर पोस्टिंग की है। राम कंडवाल ने कहा कि उनके पास अभी दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन सरकार चाहे तो उच्चस्तरीय जांच करा ले। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
आंदोलन आगे बढ़ेगा
संघ ने चेतावनी दी कि यह सिर्फ शुरुआत है। यदि 7 दिन के भीतर आदेश निरस्त नहीं हुआ तो अगला कदम मंत्री आवास घेराव होगा। प्रदेश के हर जिले से युवा देहरादून आकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करेंगे।
पृष्ठभूमि क्या है
पिछले हफ्ते शहरी विकास निदेशालय ने आदेश जारी कर विभिन्न नगर निगमों, पालिकाओं और पंचायतों में काम कर रहे कर्मचारियों को प्रभारी EO की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी थी। तर्क दिया गया था कि नियमित EO न होने से विकास कार्य रुके हैं।
लेकिन सेवा नियमावली 2016 का हवाला देते हुए कर्मचारी संगठनों ने कहा कि EO का पद वरिष्ठता और चयन प्रक्रिया से भरना जरूरी है। क्लर्क या सफाई निरीक्षक को सीधे यह जिम्मेदारी देना गलत है।
हाईकोर्ट का आदेश भी बीच में
2025 में नैनीताल हाईकोर्ट ने भी नगर निकायों में EO की कमी पर सरकार को नोटिस दिया था। कोर्ट ने 4 महीने में स्थायी समाधान निकालने को कहा था। बेरोजगार संघ का आरोप है कि सरकार ने कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल नियमित भर्ती टालने के लिए किया।
युवाओं का पक्ष
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि वे वर्षों से EO और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अगर भर्ती निकाली जाती तो हजारों को मौका मिलता। विभागीय व्यवस्था के नाम पर उनका हक मारा गया है।
फिलहाल विभाग की चुप्पी
खबर लिखे जाने तक शहरी विकास विभाग या मंत्री राम सिंह कैड़ा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अब सरकार इस दबाव में क्या कदम उठाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।



