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आर्येंद्र शर्मा 2017 विधानसभा चुनाव मे ही दिखा चूके है दम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने ही आंक लिया था कम

Aryendra Sharma had already demonstrated his mettle in the 2017 Assembly elections, yet the party's state president had underestimated him.

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सहसपुर विधानसभा मे सियासी पारा उफान पर है

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह की दावेदारी के बाद आर्येंद्र शर्मा के दिल्ली दौरे ने हलचल तेज करदी है।

लेकिन आपको बता दे की आर्येंद्र शर्मा भी मंझे हुए नेता है वो पिछले 20 सालो से सहसपुर मे मेहनत कर रहे है सरल सौभाव के धनी और मिलनसार व्यक्ति है

छेत्र के हर सुख दुख मे जनता के साथ खडे रहते है

आर्येंद्र शर्मा को पहली बार 2012 मे कांग्रेस ने सहसपुर से टिकट दिया वो मजबूती से चुनाव लड़े और 21 हजार वोट लेने मे कामयाब रहे मात्र 5 हजार वोटो से चुनाव हारे

हार का कारण भी कांग्रेस से बगावात कर के चुनाव लड़े नेता रहे गुलजार अहमद बागी होकर लड़े और 9500 वोट प्राप्त किये वही आर्येंद्र शर्मा की हार का कारण रहा।

इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव मे उस वक़्त कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय खुद सहसपुर से चुनाव लड़ने उतर पड़े और आर्येंद्र शर्मा का टिकट काट दिया गया शर्मा लगातार छेत्र मे कार्य कर रहे थे समर्थको के दबाव मे वे निर्दलीय लड़ने कूद पड़े और 23000 वोट हासिल किए प्रदेश अध्यक्ष किशोर भी चुनाव हार गए आर्येंद्र शर्मा ने पार्टी को एहसास दिलाया की वो छेत्र मे कितना दम ख़म रखते है।

2022 के चुनाव मे आर्येंद्र शर्मा ने बम्पर वोट प्राप्त किये उन्हें 56000 वोट मिले लेकिन फिर भी वो चुनाव हार गए इस बार कारण रहा उनके ही छेत्र के नेता का मुस्लिम यूनिवर्सिटी वाला बयान लेकिन आर्येंद्र शर्मा उसके बाद भी सहसपुर की जनता का साथ नही छोड़ा वो अभी भी छेत्र मे लगातार कार्य कर रहे है ऐसे मे ये तो साफ है की आर्येंद्र शर्मा के बिना कांग्रेस सहसपुर नही जीत सकती जिसका कारण है उनके साथ जुडा हुआ उनका वोट बैंक जो व्यक्तिगत तोर पर आर्येंद्र शर्मा के साथ है फिर चाहे वो किसी भी पार्टी से हो

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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