ग्रीन गुरुकुल 2026 का आगाज 17 अगस्त से, उत्तराखंड के स्कूलों के बीच होगी राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रतियोगिता

देहरादून: युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से वेस्ट वारियर्स सोसाइटी अपनी युवा पहल YUWA (Youth United for Waste & Climate Action) के तहत ‘ग्रीन गुरुकुल 2026’ का चौथा संस्करण 17 अगस्त से शुरू करने जा रही है। एक महीने तक चलने वाली इस राज्य स्तरीय अंतर-स्कूल प्रतियोगिता का आयोजन उत्तराखंड सरकार के राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय (SECCCD) और बायोडायवर्सिटी विभाग के सहयोग से किया जा रहा है।

इस प्रतियोगिता में देहरादून, विकासनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी के सरकारी और निजी स्कूलों के छात्र हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को केवल पर्यावरण जागरूकता तक सीमित न रखते हुए उन्हें कचरा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर व्यावहारिक कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है।
कक्षा 6 से 12 तक के छात्र होंगे शामिल
ग्रीन गुरुकुल 2026 में कक्षा 6 से 12 तक के छात्र विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों और चुनौतियों में हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिता के दौरान सफाई अभियान, वेस्ट-टू-आर्ट, कपड़ा दान अभियान, सीड्स ऑफ चेंज, नेचर सेंसस, क्लाइमेट जैम, ग्रीन गैलरी, जंक फंक फ्यूजन, प्लास्टिक गुल्लक समेत कई इको-फ्रेंडली गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

पिछले वर्ष 39 स्कूलों ने लिया था हिस्सा
वर्ष 2023 में शुरू हुई इस पहल को लगातार अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025 के संस्करण में 39 स्कूलों के 1,075 छात्रों ने भाग लिया था और उन्होंने मिलकर 2,745 पर्यावरण एवं जलवायु संरक्षण से जुड़े कार्य पूरे किए थे। प्रतियोगिता में इकोल ग्लोबल इंटरनेशनल गर्ल्स स्कूल, यूनिवर्सल एकेडमी, राजा राम मोहन राय एकेडमी, कासिगा स्कूल, द हेरिटेज स्कूल, दून गर्ल्स स्कूल और केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी सहित कई प्रतिष्ठित सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों ने भाग लिया था। दून गर्ल्स स्कूल वर्ष 2025 का विजेता बना था।
विजेताओं को मिलेगा सम्मान
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों और टीमों को प्रमाण पत्र, पदक और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि ग्रीन गुरुकुल का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि वे अपने स्कूल और आसपास के क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला सकें।



