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“बिल्डर पुनीत अग्रवाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 29 मई तक कार्रवाई पर रोक”

पुनीत अग्रवाल, जो एटीएस कॉलोनी में व्यवसायी हैं, ने अघोषित रूप से उन कार्रवाइयों के खिलाफ न्यायालय का सहारा लिया जिनका वे सामना कर रहे थे। स्थानीय स्तर पर यह विवाद चल रहा था और प्रशासनिक दंडात्मक कदमों की आशंका के कारण अग्रवाल ने न्यायालय से सुरक्षा की मांग की थी।

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देहरादून के एटीएस कॉलोनी में रहने वाले स्थानीय व्यवसायी पुनीत अग्रवाल को आज न्यायालय ने अस्थायी राहत प्रदान की है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आगे की अग्रिम सुनवाई की तारीख 29 मई 2026 तय की और तब तक पुनीत अग्रवाल के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि अगली सुनवाई के दौरान सचिव (आवास) और वन सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले में न्यायालय की सहायता के लिये उपस्थित रहेंगे। इन अधिकारीयों की मौजूदगी अदालत को घटनाक्रम और संबंधित प्रशासनिक कार्रवाइयों के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक मानी गई।

उत्तराखंड हाईकोर्ट में मसूरी क्षेत्र में फलदार पेड़ों की कटाई और लेआउट स्वीकृति से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने विकास प्राधिकरण और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

सुनवाई के दौरान एमडीडीए सचिव और डीएफओ मसूरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। कोर्ट को बताया गया कि संबंधित भूमि पर पहले 22 फलदार पेड़ मौजूद थे, जबकि डीएफओ की ओर से केवल 8 पेड़ होने और उनमें से 2 को काटने की अनुमति दिए जाने की जानकारी दी गई थी। इस पर न्यायालय ने अधिकारियों से पूछा कि जब भूमि पर फलदार पेड़ मौजूद थे तो लेआउट प्लान को मंजूरी कैसे दी गई।

कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि 25 अप्रैल 2026 को दो आम के पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी, जबकि 6 सितंबर 2024 की अधिसूचना के अनुसार आम समेत कई फलदार वृक्षों की कटाई प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। न्यायालय ने इस मामले में संबंधित फाइलें तलब कर जांच के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र डोभाल ने कहा कि विकास प्राधिकरण, बिल्डर और कुछ अधिकारी मिलकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। वहीं याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने क्षेत्र को सील रखने की मांग करते हुए कहा कि यदि क्षेत्र खोला गया तो और पेड़ों की कटाई हो सकती है।

हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक टीम गठित कर मौके का निरीक्षण करने और एसएचओ द्वारा बताए गए 22 फलदार पेड़ों के संबंध में रिपोर्ट अगली सुनवाई तक पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने साफ कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को होगी, जिसमें सचिव आवास और वन सचिव भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की सहायता करेंगे।

इस फैसले से एटीएस कॉलोनी व आसपास के निवासियों में अल्पकालिक राहत की भावना बनी है। पुनीत अग्रवाल के समर्थक व स्थानीय नागरिक इसे न्यायिक प्रक्रियाओं की सकारात्मक पहल मान रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की अगली सुनवाई में उपस्थिति से मामले की पारदर्शिता को बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

Faizan Khan Faizy Editorial Advisor

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