
देहरादून
पर्यटन सीज़न को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब वहां कैफ़े, रेस्टोरेंट, बार , होटल और कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे तक संचालित करने की अनुमति दी गई है। इस फैसले से पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने कहा,
“हमने सभी को 24 घंटे काम करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।”

वहीं चंडीगढ़ प्रशासन ने भी शहर के विभिन्न हिस्सों में होटल, कैफ़े बार और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को उनकी क्षमता और नियमों के अनुसार 24 घंटे संचालित करने की अनुमति दे दी है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

पर्यटन आधारित राज्यों में इस तरह के फैसलों को आधुनिक पर्यटन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। देर रात तक खुले रहने वाले कैफ़े, रेस्टोरेंट और बाजार पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं और स्थानीय व्यापार को भी गति देते हैं।
दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में पहले से ही देर रात तक बाजार, कैफ़े और रेस्टोरेंट खुले रहते हैं। वहां नाइट लाइफ और पर्यटन गतिविधियां शहर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जिसे पर्यटन और शिक्षा का बड़ा केंद्र माना जाता है, वहां रात 10 बजे के बाद ही अधिकांश बाजार और सड़कें सुनसान और खामोश हो जाती हैं।
अब उत्तराखंड, खासकर देहरादून और मसूरी जैसे पर्यटन केंद्रों में भी इस तरह की मांग तेज होने लगी है। देहरादून को उत्तराखंड की पर्यटन राजधानी माना जाता है, जहां हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। शहर में तेजी से कैफ़े संस्कृति और नाइट लाइफ का विस्तार हो रहा है, लेकिन समय सीमा और प्रशासनिक नियमों के कारण कारोबारियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
व्यापारियों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि देहरादून में भी नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से 24 घंटे व्यापारिक गतिविधियों की अनुमति दी जाए तो इससे पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा।
अब देखना होगा कि हिमाचल और चंडीगढ़ की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार देहरादून और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए ऐसा कोई बड़ा फैसला कब लेती है।
दिल्ली एनसीआर में पहले से है ये नियम लागू आख़िर देहरादून ही क्यों पढ़ जाता है 10 बजे ही सुनसान खामोश।



