
जनहित और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा कराने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

बुधवार को ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय एवं राज्य महत्व की परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान वन संपदा को न्यूनतम क्षति पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही प्रतिपूरक वनीकरण (कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन) के लिए आवश्यक सीए भूमि का समयबद्ध चिन्हीकरण भी सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि आशारोड़ी-झाझरा-मसूरी हाईवे परियोजना के लिए लगभग 110 हेक्टेयर सीए भूमि की आवश्यकता है। इस पर डीएम ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों को परियोजना का विस्तृत प्लान प्रस्तुत करने तथा वन विभाग को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग की 14 परियोजनाओं के लिए 68 हेक्टेयर सीए भूमि की आवश्यकता के संबंध में संबंधित उपजिलाधिकारियों और वन विभाग के अधिकारियों को जल्द भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने वन भूमि हस्तांतरण और सीए भूमि चिन्हीकरण से जुड़े लंबित मामलों के समाधान के लिए प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), उपजिलाधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के अधिशासी अभियंताओं की संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि उपलब्धता विकास परियोजनाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए तहसीलदारों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें भूमि चयन प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने तथा वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी चकराता वैभव कुमार, अपर जिलाधिकारी प्रशासन समृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, उपजिलाधिकारी रविंद्र जुवांठा, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग ओमपाल सिंह, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं वन विभाग के अधिकारी तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं विभिन्न उपजिलाधिकारी एवं कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।



