उत्तराखंड के मदरसों में अब तालीम के साथ संस्कार, ‘शुक्र की डायरी’ में दर्ज होंगे नेक काम

देहरादून। उत्तराखंड के मदरसों में अब शिक्षा का दायरा धार्मिक शिक्षा और किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। बच्चों को भाईचारे, समाज सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भाईचारे और समाज सेवा की थीम पर नए अध्याय जोड़े गए हैं।
मदरसों में बच्चों को समाज के प्रति जिम्मेदारी समझाने के लिए ‘शुक्र की डायरी’ शुरू की जाएगी। इसमें बच्चे रोजाना किए गए नेक काम और किसी की मदद करने जैसी गतिविधियों को दर्ज करेंगे। इसके जरिए बच्चों में सेवा और अच्छे कार्यों के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा ईद, बकरीद और मुहर्रम जैसे अवसरों पर होने वाले कार्यक्रमों में हर वर्ग के लोगों को आमंत्रित करने की योजना है। इसका उद्देश्य आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश देना है।
मदरसों में अब उर्दू के साथ हिंदी में भी वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे बच्चों में संवाद करने, दूसरे के विचार सुनने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता विकसित होगी।
452 मदरसों में सिर्फ 60 ने मांगी मान्यता
प्रदेश में मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 452 मदरसे संचालित थे। 30 जून को मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद अब इन मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत संचालित होना है। हालांकि, करीब डेढ़ महीने बाद भी मान्यता के लिए केवल 60 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग को मिले हैं।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि जो संचालक मान्यता लेने के लिए तैयार नहीं हैं और बिना मान्यता बच्चों को दाखिला देकर मदरसे संचालित कर रहे हैं, उनके संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट सोमवार तक भेज दी जाएगी।
प्राधिकरण के अनुसार मदरसा संचालकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता लेने के लिए कहा जा रहा है। नए पाठ्यक्रम में आधुनिक शिक्षा, व्यवहारिक ज्ञान, भाईचारे और समाज सेवा को भी महत्व दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के लिए केवल तालीम ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की समझ भी जरूरी है।


