उत्तराखंड

उत्तराखंड में 1 जुलाई से बदलेगी मदरसों की शिक्षा व्यवस्था, आधुनिक विषय होंगे अनिवार्य

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देहरादून: उत्तराखंड सरकार एक जुलाई से मदरसों में नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत मदरसों में दोहरी पाली (डुअल शिफ्ट) में पढ़ाई होगी। दिन में राज्य शिक्षा बोर्ड के अनुसार आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे, जबकि शाम के समय धार्मिक शिक्षा दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से छात्रों को राज्य बोर्ड का मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र मिलेगा।

हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर होंगे अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषय अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाएंगे। मदरसा बोर्ड की मान्यता न होने के कारण पहले करीब 45 हजार छात्र प्रभावित हुए थे। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि अब तक 20 मदरसों के ऑफलाइन आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और ऑनलाइन आवेदन के लिए वेबसाइट भी जल्द शुरू होने की संभावना है।

धार्मिक शिक्षा के साथ संविधान और मानवाधिकार भी पढ़ाए जाएंगे

सरकार द्वारा तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के साथ संविधान, मानवाधिकार, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों को भी शामिल किया गया है। प्रारंभिक कक्षाओं में अरबी हुरूफ, कलिमा, वुजू और नमाज की बुनियादी शिक्षा दी जाएगी, जबकि उच्च कक्षाओं में कुरआन का तर्जुमा, हदीस, फिक्ह और सीरत के साथ आधुनिक सामाजिक विषय भी पढ़ाए जाएंगे।

452 मदरसों में लागू होंगे नए मानक

प्रदेश में वर्तमान में 452 मदरसों में 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें से लगभग 150 मदरसे पहले से स्कूलों की तर्ज पर संचालित हो रहे हैं, जबकि बाकी संस्थानों को प्राधिकरण द्वारा तय 20 मानकों को पूरा करना होगा। दूसरी ओर जमीयत उलमा-ए-हिंद और मदरसा एसोसिएशन ने धार्मिक शिक्षा में हस्तक्षेप का विरोध करते हुए इसे मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है।

डिजिटल माध्यम से होगी पढ़ाई

नई शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। छात्रों को आई-कुरआन ऐप, दीक्षा प्लेटफॉर्म, क्यूआर कोड, ऑडियो-वीडियो कंटेंट और वर्चुअल टूर के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या को देखते हुए ऑफलाइन अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सीयूईटी प्रवेश प्रक्रिया में देरी से छात्र परेशान

वहीं, कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) का परिणाम घोषित होने के बावजूद हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने अभी तक प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे छात्र-छात्राओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि दाखिले में देरी के कारण वे अन्य विकल्पों पर भी निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सीयूईटी परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जबकि नया शैक्षणिक सत्र 13 जुलाई से प्रारंभ होना प्रस्तावित है।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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