
देहरादून
राजधानी देहरादून में विद्युत कनेक्शन को लेकर एक पीड़ित परिवार पिछले कई दिनों से यूपीसीएल के चक्कर काट रहा है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसके नवनिर्मित मकान में अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं लगाया गया है। हैरानी की बात यह है कि मामला जिलाधिकारी देहरादून के जन शिकायत निवारण दिवस तक पहुंचा और वहां से संबंधित विभाग को निर्धारित समय में कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

पीड़ित अश्वनी कुमार पुत्र कंवरपाल सिंह, निवासी ग्राम सिंगीवाला, शीशमबाड़ा, देहरादून ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उसने अपने नवनिर्मित मकान में विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया और कनेक्शन से संबंधित निर्धारित शुल्क भी जमा कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उसे बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पाया।
शिकायत के अनुसार, बिजली कनेक्शन के लिए विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन रास्ते को लेकर कथित तौर पर आपत्ति जताई गई। पीड़ित का कहना है कि जिस रास्ते का उपयोग कर वह अपने मकान तक पहुंचता है, वह पूर्व में प्लॉट की रजिस्ट्री में भी दर्ज है। पीड़ित ने संबंधित लोगों से रास्ते को लेकर समस्या का समाधान कराने का अनुरोध भी किया, लेकिन उसका आरोप है कि मामले को लगातार टाला जा रहा है।
डीएम कार्यालय ने 7 दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए, फिर भी मामला लटका!
सबसे गंभीर सवाल जिलाधिकारी कार्यालय की कार्रवाई के बाद भी समाधान नहीं होने को लेकर खड़े हो रहे हैं। शिकायती पत्र पर जिलाधिकारी कार्यालय, देहरादून के जन शिकायत निवारण दिवस की मुहर लगी है, जिसमें संबंधित विभाग/कार्यालय को प्रकरण के निस्तारण के लिए निर्धारित समयावधि में आवश्यक कार्रवाई करते हुए संबंधित पक्ष को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पीड़ित का कहना है कि मामले में यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता को 15 दिन के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय बीतने के बाद भी उसे बिजली का कनेक्शन नहीं मिला। पीड़ित के मुताबिक, अधिकारियों से संपर्क करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और हर बार मामला टाल दिया जाता है।
सवाल बड़ा है—क्या यूपीसीएल के एक्सईएन पर डीएम के आदेश भी बेअसर हैं?
मामला अब सिर्फ एक परिवार को बिजली कनेक्शन मिलने या न मिलने तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी स्तर से किसी शिकायत के निस्तारण के निर्देश दिए जाते हैं और संबंधित अधिकारी को समयसीमा भी दी जाती है, तो फिर उसका पालन क्यों नहीं हुआ?
अगर पीड़ित ने सभी आवश्यक शुल्क जमा कर दिए हैं और कनेक्शन देने में कोई तकनीकी या कानूनी बाधा है तो यूपीसीएल को स्पष्ट रूप से उसका कारण बताना चाहिए। लेकिन यदि कोई वैध अड़चन नहीं है तो एक आम नागरिक को विभागीय चक्कर लगाने और अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने के लिए आखिर कब तक मजबूर किया जाएगा?
‘अंधेरे’ में पीड़ित परिवार, जिम्मेदार अधिकारी कब करेंगे कार्रवाई?
पीड़ित का कहना है कि उसने मेहनत-मजदूरी कर रहने के लिए मकान बनाया है और इसके लिए बैंक से ऋण तक लिया है। बिजली नहीं होने के कारण वह अपने नए घर में ठीक से शिफ्ट भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मामला परिवार की रोजमर्रा की जरूरत और आर्थिक परेशानी से भी जुड़ा हुआ है।
अब निगाहें जिलाधिकारी देहरादून और यूपीसीएल के उच्चाधिकारियों पर हैं। क्या जिलाधिकारी के आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा? क्या पीड़ित को तत्काल बिजली कनेक्शन दिलाकर उसकी परेशानी दूर की जाएगी? या फिर फाइलों और आदेशों के बीच यह परिवार यूं ही अंधेरे में रहने को मजबूर रहेगा?



